बाल विकास सिद्धांत :- जीन पियाजे का नैतिक विकास सिद्धान्त

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जीन पियाजे का नैतिक विकास सिद्धान्त

प्रवर्तक- जीन पियाजे

जीन पियाजे ने नैतिक विकास को 2 अवस्थाओं के द्वारा समझाया है।

परायत नैतिकता की अवस्था- 2 वर्ष से 8 वर्ष तक

  • इस अवस्था में बालक अपने से बड़ों के साथ अन्तःक्रिया करता है। अर्थात् असमान अन्तःक्रिया करता है।
  • इस अवस्था में नैतिक विकास के जो भी सम्प्रत्यय विकसित होते है वे दृढ़ निरपेक्ष व अपरिवर्तनशील होते है। तथा बालक सर्वव्यापी न्याय में विश्वास करता है।

स्वायत नैतिकता अवस्था- 9 वर्ष से 11 वर्ष तक

  • इस अवस्था में बालक अपने सगीं-साथियों के साथ अन्तःक्रिया करता है। इस अवस्था के बालक का मानना होता है। कि नियमों में परिवर्तन किया जा सकता है व उनकों मानना आवश्यक नहीं हैं तथा आलक सर्वव्यापी न्याय में विश्वास नहीं करता है।


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