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किशोरावस्था
परिभाषाऐं
- स्टेनली हाॅल- किशोरावस्था प्रबल दबाव व तनाव तुफान एवं संघर्ष का काल है।
- किशोरावस्था में मानसिक, शारीरिक व सवेंगात्मक परिवर्तन अकस्मात होते है।
- किशोरावस्था एक नया जन्म है क्योकिं इसमें उच्चतर व श्रेष्ठतर मानव विशेषता प्रकृत होती है।
- वेलेन्टाइन- किशोरावस्था व्यक्तिगत व घनिष्ठ मित्रता की अवस्था या विशेषता है।
- किशोरावस्था अपराध प्रवृति के विकास का नाजुक समय है।
- राॅस- किशोर समाज सेवा के आदर्शो का निर्माण व पोषण करते है।
- शिशु के समान किशोरो को वातावरण से समायोजन का कार्य पुनः आरम्भ करना होता है।
- किलपैट्रिक- किशोरावस्था जीवन का सबसे कठीन काल है।
- जोन्स- किशोरावस्था शैशवावस्था की पुनावृति है।
- काॅल सैनिक- किशोर प्रोढ़ो को अपनें मार्ग में बाधा समझतें है जो उन्हें स्वतत्रता का लक्ष्य प्राप्त करने से रोकते है।
- जीन पियाजें- किशोर व किशोरियां अध्ययन के साथ रेड़ियों सुनना, टीवी देखना पसंद करते है।
- किशोरावस्था आदर्शों की अवस्था है, सिद्धान्तों के निर्माण की अवस्था है तथा जीवन का सामान्य समायोजन है।
- किशोरावस्था पर क्रमबद्ध व व्यवस्थित अध्ययन अमेरिका के मनोवैज्ञानिक स्टेनली हाॅल ने किया था।
- स्टेनली हाॅल ने किशोरावस्था के एक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया तथा इसे अपनी पुस्तक ऐडोलशेन्स में 1904 मे प्रकाशित किया।
- एरिक्सन- जिस विशिष्टता का किशोर स्पष्टीकरण चाहते है कि वह कौन है या उसकी भूमिका क्या है- वह बच्चा है या वयस्क।
- वैयक्तिक विशिष्टता- इसे एरिक्सन ने अह्म विशिष्टता की समस्या कहा है।
- परिवर्तन की अवस्था/ प्रोढ़ावस्था की दहलीज किशोरावस्था के अन्य नाम है।
उपनाम-
- अमुर्त चिंतन की अवस्था।
- दल भक्ति की अवस्था।
- जीवन का सबसे कठीन काल।
- अटपटी व उलझन की अवस्था।
- समस्याओं की अवस्था।
- द्रुत एवं तीव्र विकास की अवस्था।
- स्वर्ण काल।
- बसन्त ऋतु।
- प्रबल दबाव व तनाव की अवस्था।
- सवेंगात्मक परिवर्तन की अवस्था।
- तार्किक चिंतन की अवस्था।
- संघर्ष और तुफान की अवस्था।
- उथल-पुथल की अवस्था।
- संक्रमण काल की अवस्था। संक्रातिं काल।
- टीन एज।
- सुनहरी अवस्था।
- सुंदरता की अवस्था।
- आत्म सम्मान व आत्म स्वीकृति की अवस्था।
- व्यक्तिगत एवं घनिष्ठ मित्रता की अवस्था।
- समाजिक स्वीकृति की अवस्था।
- परिवर्तन की अवस्था।
- अवास्तविकताओं की आयु।
- प्रौढ़ावस्था/ वयस्कावस्था की दहलीज।
- आंधी तुफान/ तनाव संघर्ष की अवस्था।
- उलझन की अवस्था।
कार्य व विशेषताऐं
- चहुंमुखी विकास अर्थात शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व सवेंगात्मक विकास।
- बुद्धि का अधिकतम विकास।
- व्यक्तिगत एवं घनिष्ठ मित्रता।
- कल्पना का बाहुल्य।
- दिवास्वपन की प्रवृति।
- वीर पूजा/ नायक पूजा की प्रवृति।
- आत्मसम्मान को अधिक महत्व।
- पीढ़ीयों में अन्तर के कारण विचारों में मतभेद।
- समायोजन का अभाव।
- मानसिक स्वतंत्रता व विद्रोह की स्थिति।
- अपराध प्रवृति का विकास।
- स्वतंत्र सोच का विकास।
- ईश्वर तथा धर्म में विश्वास या अविश्वास।
- समाजसेवा व देशभक्ति की भावना।
- समवयस्क समुह भावना का विकास।
- स्वपहचान/ स्वाभिमान की भावना।
- आत्मचेतना, आत्मसम्प्रत्यय, आत्मनिर्भर बनने की चिन्ता।
- व्यवसाय चुनाव की चिन्ता।
- थ्वचारों व सवेंगों में परिपक्वता।
- टपनों से बिछुडनें का गम।
- सवेंगात्मक परिवर्तन तीव्र गति से।
- अमुर्त चिंतन कि प्रवृति या योग्यता का विकास।
- काम प्रवृति- आत्मप्रेम, समलिगींय प्रेम, विषमलिगींय प्रेम।
- आत्मनिर्भरता बनाम निर्भरता या आदर्शवाद बनाम यथार्थवाद।
- माता-पिता से अधिक हम उम्र को महत्व।
- मित्र संस्कृति अपनाना।
- सोन्द्रर्य का उपासक।
- विपरित लिंग के प्रति आकर्षणं
- अध्ययन के प्रति गम्भीर।
- रूचियों में परिवर्तन।
- किशोरों की वाणी में कर्कशता या भारीपन आना।
- किशोरियों की वाणी में मधुरपन या कोमलपन आना।
- समस्यात्मक बालक बनना।
- जीवन साथी के चुनाव की समस्या।
- मादक प्रदार्थों का सेवन करने की समस्या।
- वित्तीय समस्या।
- आत्महत्या की समस्या।
- नेतृत्व की भावना।
- अपराध की ओर ले जाने वाली अवस्था।
- योन उर्जा सक्रीय रहती है।
- लम्बाई व विकास में तीव्र वृद्धि देखने को मिलती है। सवेंगों में प्रबलता देखने को मिलती है।
- मानसिक विकास में तीव्र वृद्धि देखने को मिलती है।
- असंभव कार्य भी कर देता है।
- मन/मस्तिष्क पुनः चंचल और अस्थिर होता है।
शारीरिक विकास
- जनन अंगों का विकास।
- थाइराइड ग्रंथि सक्रिय
- आवाज में बदलाव
- मस्तिष्क का भार 1400 ग्राम
मानसिक विकास
- क्रो एण्ड क्रो- 16 वर्ष में पुर्ण मानसिक विकास हो जाता हैं।
- वाट्सन- 18 वर्ष में पुर्ण मानसिक विकास मानतें है।
- शब्द भण्डार में वृद्धि।
- भावी व्यवसाय, रंग, रूप के लिए चिंतीत।
- अभिरूचियों में परिवर्तन।
- त्वरित विकास का सिद्धान्त- स्टेनली हाॅल कहता है कि विकास अकस्मात होता है।
- क््रमिक विकास का सिद्धान्त- थार्नडाइक/हाॅलिगवर्थ कहते है कि किशोरावस्था में विकास अकस्मात ना होकर क्रमिक रूप से होता है।
किशोरावस्था मे आहार सम्बंधी विकार-
- एनोरेक्सिया नर्वोसा- इस रोग से पीडित व्यक्ति का वजन सामान्य वजन से भी कम होता है। उसके बावजूद इस डर से की कही वनज न बढ़ जाए भुखा रहने लगता है तथा अपने खाने की मात्रा में कटोती करने लगता है।
- बुलिमियााा नार्वोसा- इस रोग से पीडित व्यक्ति पहले तो अधिक खा लेता है फिर इस डर से की कही वजन न बढ़ जाए उस खाने को उगल देता है तथा वजन पर नियंत्रण करने के लिए अनावश्यक व्यायाम और दवाईयों का सेवन करता है।
- बींग आहार विकार- इस रोग से पीडित व्यक्ति तब तक खाये जाता है जब तक कोई समस्या उत्पन्न न हो जाये। ऐसा व्यक्ति अधिक खाने की आदत तथा वजन नियंत्रण करने मे असमर्थ रहता है।
आहार सम्बंधी विकार लड़को की अपेक्षा लडकीयों में अधिक पाये जाते है।
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