विकास की परिभाषाऐं
- गैसेलः- विकास एक तरह का परिवर्तन हैं जिसकें द्वारा बालक में नवीन योग्यताओं व विशेषताओं का विकास होता है।
- ब्रुनरः- विकास की किसी भी अवस्था में कुछ भी सिखाया जा सकता है।
- बर्कः- बाल विकास मनोविज्ञान की वह शाखा हैं, जिसकें अन्तर्गत जन्म से पूर्व से किशोरावस्था, परिपक्वावस्था तक होने वाले विकास का अध्ययन किया जाता है।
- मैस्लोंः- विकास एक प्रकार का परिवर्तन है जिसमें बालक में नवीन विशेषता व क्षमता का विकास होता है।
- श्रीमती हरलाॅकः- विकास व्यक्ति में नवीन विशेषता व योग्यता लाता है या प्रस्फुटित करता है।
हरलाॅक ने विकास को चार भागों में बाटा-
- आकार में परिवर्तन - शारीरिक परिवर्तन, लम्बाई-चोड़ाई व भार में परिवर्तन
- अनुपात में परिवर्तन - शारीरिक, मानसिक, नैतिक, सवेंदनात्मक, सामांिजक सभी पक्षों में परिवर्तन
- पुराने चिन्हों का लोप - कच्चें दांत/दुध के दांत का जाना, बोली व आवाज का बदलना
- नवीन चिन्हों का उदय - स्थाई दांत आना, दाढ़ी मुछ आना, लड़कों की आवाज में कर्कशपन व लड़कीयों की आवाज में मधुरपन आना।
विकास के प्रमुख नियम /सिद्धान्त
समान प्रतिमान का नियम :- विकास समान नियमों पर आधारित होता हैं इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता हैं। प्रत्येक जाति चाहे वह पशुजाति हो या मनुष्य जाति अपनी जाति के अनुरूप् ही विकास के प्रतिमान का अनुसरण करती है।
क्रमबद्धता का /निश्चित श्रृखला का नियम:- विकास निश्चित क्रम में होता हैं, शैशवावस्था - बाल्यावस्था - किशोरावस्था
सतत् विकास या निरन्तरता का नियम:- विकास कि प्रक्रिया अवाध गति से चलती रहती है यह तेज या मंद होती रहती है।
परस्पर संबन्ध का नियम:- बालक के शारीरिक, मानसिक, नैतिक, सवेंदनात्मक, सामांिजक व भाषायी आदि पक्षों के विकास में परस्पर संबन्ध होता हैं।
निश्चित दिशा का नियम:-
- मस्तबोधमुखी नियम /सिर पुछ नियम -विकास हमेशा सिर से पैर अर्थात् उपर से नीचे की ओर होता हैं। सिर - धड़ - हाथ - पैर
- निकट दूर /केन्द्र से सिरों की ओर नियम - विकास हमेशा केन्द्र से सिरों कि ओर होता है। हथेली - अगुलियां -अगूॅठा
सामान्य से विशिष्ट क्रियाओं का नियम:- शिशु पहले सामान्य क्रियाऐं करता है व उसके बाद विशिष्ट।
व्यक्तिगत भिन्नता का नियम:- जन्म से ही कोई बालक प्रतिभाशाली कोई बालक सामान्य बुद्धि, कोई मन्द बुद्धि होता हैं।
विकास की गति में विभिन्नता का नियम:- प्रतिभाशाली बातक का विकास तेजी से और सामान्य बुद्धि वाले बालक का विकास मंद गति से होता है।
अंतक्रिया का नियम:- बालक देखकर, सुनकर, व अनुभव से सीखना, अंतक्रिया से पहचानता है जैसे पापा की आवाज पहचानना,
वर्तुलाकार का नियम:- विकास केवल लम्बाई में नहीं होता बल्कि चारों ओर होता है।
वशांनुक्रम व वातावरण के गुणनफल का नियम:- विकास, वशांनुक्रम व वातावरण के गुणनफल का प्रतिफल या परिणाम है।
व्यक्ति = वशांनुक्रम X वातावरण
परिवर्तन का नियम:-
पुर्व कथन /भविष्यवाणी का नियम:-
विकास की प्रत्येक अवस्था के अपने-अपने खतरे हैं। विकास की प्रत्येक अवस्था में सुख-शांति एक समान नहीं हैं।