बाल्यावस्था

यहां आप विश्वशनीय किताबों पर आधारित मनोविज्ञान और बाल विकास पूर्ण रूप से पढ़ सकते हैं। मनोविज्ञान और बाल विकास और अन्य कक्षाओं के विज्ञान, गणित और अन्य NCERT बुक नोट्स, समाधान, अभ्यास पत्र, आदि के लिंक प्राप्त कर सकते हैं।

मनोविज्ञान और बाल विकास से सम्बंधित महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री के लिए नीचे स्क्रॉल करें।

बाल्यावस्था

ब्लेयर जोन्स व सिम्पसन- बाल्यावस्था वह काल है जब व्यक्ति के बुनियादी दृष्टिकोण, मुल्य तथा आदर्श एक बड़ी सीमा तक निरूपित किए जाते है।

राॅस- बाल्यावस्था छद्म मिथ्या परिपक्वता का काल है।

किलपेट्रिक- बाल्यावस्था प्रतिद्वन्दात्मक सामाजिकरण का काल है।

काॅल एण्ड ब्रुस- बाल्यावस्था एक अनोखा काल है।

स्टेन या स्टैंग- ऐसा शायद ही कोई खेल हो जिसे 10 वर्ष का बालक ना खेलता हो।

शैक्षिक दृष्टिकोण से जीवनचक्र में बाल्यावस्था से महत्वपुर्ण कोई अवस्था नहीं है।


उपनाम 

  • आरम्भिक विघालय की आयु ।
  • गन्दी अवस्था।
  • स्फुति की अवस्था।
  • ज्ीवन का अनोखा काल।
  • निर्माणकारी अवस्था।
  • मूर्त चिन्तन/ तार्किक चिन्तन की अवस्था।
  • खेल की आयु
  • टोली/समुह की अवस्था।
  • वैचारिक क्रिया कि अवस्था।
  • मुर्त संक्रियात्मक अवस्था।
  • छद्म मिथ्या परिपक्वता काल।
  • प्रतिद्धन्दात्मक सामाजिकरण काल।
  • उत्पाती अवस्था।
  • शैक्षणीक दृष्टिकोण से महत्वपुर्ण काल।
  • तीव्र शारीरिक क्रियाशीलता अभिवृद्धि का काल।


कार्य या विशेषताऐं

  • मानसिक व शारीरिक विकास में स्थिरता 
  • जिज्ञासा प्रवृति प्रबल
  • यर्थाथवादी दृष्टिकोण।
  • रचनात्मक प्रवृति का विकास।
  • निरूद्देश्य भ्रमण।
  • संग्रह करने की प्रवृति।
  • चोरी करना व झुठ बोलना।
  • भाई-बहिनो से झगड़ा।
  • बर्हिमुखता आने लगती है।
  • प्रतिस्पर्धा की भावना ।
  • प्रशंसा पाने की इच्छा।
  • पक्षपात की भावना का शिकार।
  •  हीन भावना का शिकार। 
  • सवेंगों पर नियंत्रणं
  • नैतिक व सामाजिक भावना का विकास।
  • व्यवहार में चंचलता कम होने लगती हैै।
  • कार्य-कारण में सम्बन्ध स्थापित।
  • आत्मनिर्भरता पायी जाती है।
  • समलिंग समुह भावना होना।
  • खेलों में रूची।
  • मुर्त चिन्तन की योग्यता।
  • सवेदनशीलता/ तर्क/ स्मरण/ चिंतन/ मनन आदि करने लगता है।़
  • बालक की रूचिंयों में परिवर्तन।
  • अभिरूचि परिवर्तन की अवस्था।
  • योवन उर्जा निष्कर्य या सुस्त रहती है।


शारीरिक विकास

प्रतिवर्ष 5 से 6 से.मी. शरीर की लम्बाई में वृद्धि होती है।

मानसिक विकास

  • 7 वर्ष- छोटी-छोटी बातों का उल्लेख, समानता और अन्तर की समझ।
  • 8 वर्ष- कहानियां सुनाने लगता है।
  • 9 वर्ष- समय, दिन, दिनांक वर्ष आदि को समझने लगता है।
  • 10 वर्ष- बालक घुर्त गति से पढ़ने लगता है। तार्किक और निरीक्षण क्षमता विकसित होने लगती है।
  • 11 वर्ष- कठिन शब्दों को समझनें लगता है।
  • 12 वर्ष- तर्क करने लगता है। कार्य-कारण स्थापित करने सीख जाता है।

सवेंगात्मक विकास

  • सामाजिकरण की अवस्था, तीव्र सवेंग पर नियत्रण सीख जाता है।
  • तीव्र सवेंगों में कमी आने लग जाती है।
  • बुद्धि के द्वारा सवे्रगों में नियत्रण। द्धेष की भावना विकसित
  • ईच्छा की पुर्ती न होने पर निराशा उत्पन्न होती है।
  • बराबरता नहीं होने पर द्धेष की भावना, असफलता से प्राप्त भय बना रहता है।
  • आनन्द सुख उल्लास प्रफुल्लता का विकास। 
  • नकारात्मक सवेंगों में कमी व सकारात्मक सवेंगों में बढ़ोतरी।


सामाजिक विकास

  • समुह/टोली की अवस्था
  • सहयोग, मित्रता, सद्भावना, सम्मान जैसे मुल्यों का विकास।
  • सामाजिक विकास परिवार से आरम्भ, खेल से मजबूत होता है, विघालय में बर्हिमुखता आती है।
  • नकारात्मक मन का आरम्भ जैसे चोरी, झुठ, बहाने बनाना लगता है।
  • उनके आदर्शो व विचारों को अपनाता है।
  • समलिगीं भावना- बालक का मित्र बालक व बालिका का मित्र बालिका।
  • बालक स्वयं मित्र का चयन करता है। प्रशसां प्राप्ती की तीव्र ईच्छा।

      THANKS FOR READING    


मनोविज्ञान के महत्वपूर्ण टॉपिक निम्न प्रकार है-
 शिक्षा मनोविज्ञान के महत्वपूर्ण टॉपिक निम्न प्रकार है-

बाल विकास के महत्वपूर्ण टॉपिक निम्न प्रकार है-

Post a Comment

Previous Post Next Post