विकास की अवस्थाऐं और गर्भावस्था

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विकास की अवस्थाऐं

  1. गर्भावस्था - गर्भाधारण से जन्म तक - 9 माह 10 दिन या 280 दिन
  2. शैशवावस्था - जन्म से 5/6 वर्ष तक
  3. बाल्यावस्था - 6/7 से 12 वर्ष तक
  4. किशोरावस्था - 13 वर्ष से 18/19 वर्ष तक
  5. प्रोढ़ावस्था - 18 वर्ष के बाद

गर्भावस्था

गर्भावस्था 280 दिनों की होती है। इसके अन्तर्गत 10 चन्द्रमास होते है। सादाहरण शब्दों मे 9 माह।

भ्रूणिक / बीजावस्था /डिम्बावस्था/रोपण अवस्था ;ळमतउपदंजपवद वत वअंउ चमतपवकद्ध - गर्भाधारण से 2 सप्ताह तक

इस अवस्था में शिशु अण्डे़ की  शक्ल का होता है। इसका आकार पिन के हेड के बराबर होता है जिसे युक्ता कहा जाता है

दस दिनों तक यह अण्ड़ा गर्भाशय में इधर-उधर तैरता रहता है। दस दिनों तक इसे मां के द्वारा कोई आहार प्राप्त नहीं होता है। दस दिनों के बाद यह गर्भाशय की दिवार या परत से जुड जाता है। इसके कारण उसे मां द्वारा आहार मिलने लगता है। यह ही रोपण क्रिया है। 

भ्रूणिय अवस्था/पिण्डावस्था ;म्उइतवलवदपब चमतपवकद्ध. 2 सप्ताह से 2 माह

इस अवस्था में शरीर के सभी अगों का निर्माण कार्य शुरु हो जाता है। इस अवस्था के अंत तक शिशु को आसानी से पहचाना जा सकता है।

2 माह के अंत तक शिशु का भार लगभग 2 ग्राम तथा लम्बाई 1 से 2 ईंच हो जाती  है।

भ्रूण/गर्भस्थ शिशु की अवस्था ;थ्मजंस ेजंहमद्ध - 2 माह से जन्म तक

इस अवस्था में किसी नये अगं की उत्पति नहीं होती अपितु पूर्व निर्मित अंगों का पूर्ण विकास होता है।

4 माह - धड़कन सुनी जा सकती है।

5 माह - आंतरिक अंग वयस्क के समान ही कार्य करने लगते हैं।

जन्म के समय वह शिशु अपरिपक्व कहलाता है जिसका वनज 2.5 किलोग्राम या 2500 ग्राम से कम होता है।


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