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शारीरिक विकास
विकास के सभी आयामों का आधार हैं- शारीरिक विकास
शारीरिक विकास के अन्तर्गत शारीरिक अंगों व मासपेशियों का विकास सम्मिलित है।
क्रो एण्ड क्रो- मनुष्य सर्वप्रथम एक शारीरिक प्राणी है उसकी शारीरिक सरंचना उसके व्यवहार व दृष्टिकोण का आधार है।
शारीरिक विकास के चक्र-
- प्रथम चक्र- 0 वर्ष से 3 वर्ष- विकास तीव्र गति से
- द्वितिय चक्र- 3 वर्ष से 12 वर्ष- विकास मंद गति से
- तृतिय चक्र- 12 वर्ष से 15 वर्ष- विकास पुनः तीव्र गति से
- चतुर्थ चक्र- 15 वर्ष से 18 वर्ष- विकास पुनः मंद गति से
सबसे अधिक मात्रा व तीव्र गति से विकास किशोरावस्था में होता है।
श्रीमती हरलाॅक- विकास लयात्मक होता है निर्यात्मक नहीं।
शारीरिक विकास को दो भागों में बाटां है-
अगींय विकास
लम्बाई-
- शैशवावस्था में लड़को की लम्बाई अधिक होती है। लेकिन बाल्यावस्था में लड़कियों कि लम्बाई अधिक होती है। और पुनः किशोरावस्था के बाद लड़कों की लम्बाई अधिक हो जाती है।
- लडकों कि लम्बाई 18 वर्ष तक ही बढ़ती है और लड़कियों कि लम्बाई 16 वर्ष तक ही बढ़ती है।
वजन-
- वजन हमेशा लड़कों का ही अधिक रहता है।
दांत-
- 6 माह में पहला दांत जिसे दुध का दांत कहते हैं।
- 1 वर्ष में 8 दांत
- 4 वर्ष में 20 दांत
- 6 वर्ष में स्थाई दांत
- 13 वर्ष में 27 से 28 दांत
- किशोरावस्था के बाद प्रज्ञादंतों की संख्या 2+2 मिलकर 4 होती है।
- आरम्भ में नीचे के दांत निकलते है जिन्हें गणेश दन्त कहते है।
हड्यिा-
- शैशवावस्था में कुल 270 हडिडया होती है।
- बाल्यावस्था में कुल 350 हडिडयां होती है।
- किशोरावस्था में कुल 206 हडिडयां हो जाती है।
धड़कन-
- जन्म के समय बालक की 140 धड़कन प्रति मिनट होती है।
- 6 वर्ष के बालक की 100 धड़कन प्रति मिनट होती है।
- किशोरावस्था में बालक की 72 धड़कन प्रति मिनट हो जाती है।
मस्तिष्क-
- शैशवावस्था में बालक के मस्तिष्क का वजन 350 ग्राम होता है।
- बाल्यावस्था में बालक के मस्तिष्क का वजन 1260 ग्राम हो जाता है।
- किशोरावस्था में बालक के मस्तिष्क का वजन 1260 से 1400 ग्राम हो जाता है।
गत्यात्मक विकास-
इस गत्यात्मक विकास को भी दो भागों में बाटा है।
स्थुल गत्यात्मक विकास-
- इसके अन्तर्गत बडी मांसपेशीयों का समीकरण होता है जैसे हाथ, पाव, घड़, जांघ, घुटने आदि
- ठसके अन्तर्गत निम्न गतिविधियां आती है जैसे लुढ़कना, खिसकना, रेगना, चलना, खड़ा होना, दोड़ना आदि।
- गेंद पकड़ना व फेकना भी स्थुल गत्यात्मक गतिविधि ही है।
सुक्ष्म/महीन गत्यात्मक विकास-
- इसके अन्तर्गत छोटी मांसपेशीयों का समीकरण होता है जैसे आंख, कलाई, अंगुलियां आदि
- इसकें अन्तर्गत निम्न गतिविधियां आती है- भोजन करना, वस्त्र पहनना, लिखना सुई में धागा पिरोना, कंघी करना, खिलौना का प्रयोग, स्नानकरना, जुते-मोजे पहनना, कमीज के बटन बन्द करना आदि
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