शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया

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शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया 

शिक्षण एक ऐसी त्रिध्रुवीय प्रक्रिया है जिसमें शिक्षण के स्त्रोत/ मानवीय एवं भौतिक विधार्थी और विधार्थी  व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए सभी आवश्यक क्रियाओं के पारुप का नियोजन  है। 

शिक्षण में अधिगम जरुरी है जबकि अधिगम के लिए शिक्षण जरुरी नहीं है 

शिक्षण का संकुचित अर्थ-  शिक्षण के संकुचित अर्थ में औपचारिक शिक्षा प्रणाली को लिया जाता है जिसमें निश्चित समय, निश्चित स्थान व निश्चित विधियों के माध्यम से शिक्षण कराया जाता है

औपचारिक शिक्षा का मुख्य साधन विद्यालय है जिसके अंतर्गत शिक्षक  महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

फ्रोबेल के अनुसार- शिक्षक बालोद्यान कुशल माली है। 

 शिक्षण का व्यापक अर्थ- शिक्षण के व्यापक अर्थ में औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षण दोनों प्रकार की शिक्षा प्रणाली को लिया जाता है

अनौपचारिक शिक्षा  मुख्य साधन परिवार व समाज है जिसके अंतर्गत माँ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है

एडम्स ने शिक्षण को द्विमुखी/द्विध्रुवीय प्रक्रिया माना है- 1. शिक्षक    2. शिक्षार्थी

शिक्षक शिक्षण के माध्यम से शिक्षार्थी के व्यवहार में परिवर्तन लाता है

जॉन ड्यूवी व रायबर्न ने शिक्षण को त्रिध्रुवीय प्रक्रिया माना है- 1. शिक्षक  2. शिक्षार्थी  3. पाठ्यक्रम

शिक्षक-

शिक्षण प्रदान करने की महत्वपूर्ण धुरी है- शिक्षक 

कोलेस्निक के अनुसार- शिक्षा मनोविज्ञान का एक शिक्षक विशेष को यह निर्णय करने में सहायता दे सकता है कि वह विशिष्ट परिस्थितियों में  विशिष्ट समस्याओं का समाधान किस प्रकार करें।

रविंद्रनाथ टैगोर- एक शिक्षक अच्छा अध्यापन तभी करा सकता है जब वह स्वयं अध्ययनशील रहता है क्योंकि एक जलता दीपक ही दूसरे दीपक को जला सकता है यदि एक शिक्षक अपने विषय अध्ययन को समाप्त कर देता है तो वह बालकों में जाग्रति नहीं ला सकता ऐसा शिक्षक बच्चों के मस्तिष्क को बेझिल करता है

अच्छे शिक्षक की कुशलताएँ 

एक कुशल शिक्षक को अपने विषय का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए

मनोविज्ञान का ज्ञान होना चाहिए

पाठ को रोचक तरीके से पढ़ाने वाला होना चाहिए

बालक का सच्चा मित्र व पथ प्रदर्शक होना चाहिए

चरित्रवान होना चाहिए

उत्तम शिक्षण करने वाला होना चाहिए

Note:- उत्तम शिक्षण- जो जीवनोपयोगी होता है तथा जिसमे शिक्षक व छात्र दोनों की सक्रीय भूमिका हो

शिक्षार्थी/ अध्येता/ छात्र

वर्तमान समय में शिक्षा का नियोजन बालक के लिए व बालक के अनुसार किया जाता है बालक का महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जाता है जिसके चारों ओर शिक्षण प्रक्रिया घूमती है अतः शिक्षा मनोविज्ञान ने शिक्षार्थी को शिक्षण प्रक्रिया का केंद्र बिंदु मन है

विधार्थी में पांच विशेषताएँ होनी चाहिए

  1. काग(कौआ) चेष्टा
  2. बको (बगुला) ध्यान 
  3. श्वान (कुत्ता) निंद्रा 
  4. अल्पहारी 
  5. गृहत्यागी

पाठ्यक्रम 

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया पाठ्यक्रम पर निर्भर करती है पाठ्यक्रम वह साधन है जो शिक्षक व शिक्षार्थी दोनों का मार्गदर्शन करता है 

पाठ्यक्रम को अंग्रेजी में curriculum कहते है जिसकी उत्पति लेटिन भाषा के currere से हुई है जिसका अर्थ "दौड़ का मैदान" होता है

कनिघम के अनुसार- पाठ्यक्रम कलाकार के हाथ में एक यंत्र है, जिसके द्वारा वह अपनी सामग्री को अपने आदर्शो के अनुसार अपने कला ग्रह/ चित्रशाला में मोड़ता है


 

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