परिसंचरण तन्त्र, ह्रदय को कहते है।
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मानव
का ह्रदय वक्ष के मध्य
होता है।
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ह्रदय
के अध्ययन को कार्डियोलॉजी कहते
है।
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पुरुषों
के ह्रदय का वजन 300 ग्राम
होता है। महिलाओं के
ह्रदय का वजन 250 ग्राम
होता है।
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ह्रदय
शरीर का सबसे व्यस्तम
अंग है।
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मानव
ह्रदय में दो आलिंद
और दो निलय होते
है।
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मानव
ह्रदय 4 कोष्ठिय होता है।
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मछलियों
का ह्रदय 2 कोष्ठिय व सरीसृपों का
ह्रदय 3 कोष्ठिय होता है।
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मेंढक,
मगरमच्छ व घड़ियाल का
ह्रदय अपूर्ण 4 कोष्ठिय होता है।
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कॉकरोच
का ह्रदय 13 कोष्ठिय होता है।
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केचुए
के 8 ह्रदय होते है।
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नवजात
शिशु का ह्रदय 1 मिनट
में 140 से 160 बार धड़कता है।
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पांच
वर्ष के बच्चे का
ह्रदय 1 मिनट में 120 बार
धड़कता है।
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दस
वर्ष के बच्चे का
ह्रदय 1 मिनट में 99 से
100 बार धड़कता है।
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वयस्क
का ह्रदय 1 मिनट में 72 बार
धड़कता है।
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वयस्क
महिला का ह्रदय 1 मिनट
में 75 से 80 बार धड़कता है।
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बुढ़ापे
में धड़कन कम हो
जाती है। और बुढ़ापे
में ह्रदय 1 मिनट में 60 से
65 बार धड़कता है।
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जब
मानव भारी कार्य करता
है तो उसके ह्रदय
की धड़कन गति बढ़
जाती है।
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धड़कन
को सुनने के लिये स्टेटस्कोप
काम मे लिया जाता
है।
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स्टेटस्कोप
की खोज लेनक ने
की थी।
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मानव
ह्रदय को चारों तरफ
से एक झिल्ली घेरे
रहती है जिसे
पेरिकार्डियम झिल्ली कहते है।
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पेरिकार्डियम
झिल्ली में पेरिकार्डियल द्रव
भरा रहता है। जो
ह्रदय को बाहरी आघातों
से सुरक्षा प्रदान करता है।
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मानव
ह्रदय में रक्त का
परिसंचरण होता है इसी
कारण इसे परिसंचरण तंत्र
कहते है।
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Note:- परिसंचरण
तन्त्र की खोज विलियम
हार्वे ने की थी।
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ह्रदय
में कैसे परिसंचरण होता
है?
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सर्वप्रथम
शरीर के अंगों से
अनओक्सीजनित रक्त को महाशिरा
के माध्यम से दाये आलिंद
में लाया जाता है।
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फिर
दाये आलिंद से अनओक्सीजनित रक्त
(अशुद्ध रक्त) को दाये निलय
में पहुचाया जाता है।
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दाया
आलिंद व दाया निलय
के मध्य त्रिवलन कपाट
उपस्थित होता है।
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दाया
निलय से फिर अनओक्सीजनित
रक्त को फुफ्फुसीय धमनी
से फेफड़ो में भेजा जाता
है।
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फेफड़ो
में अनओक्सीजनित रक्त ऑक्सीजन से
मिलकर ओक्सीजनित रक्त(शुद्ध रक्त)
बन जाता है। जो
बिल्कुल साफ होता है।
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ओक्सीजनित
रक्त को फेफड़ो से
फुफ्फुसीय शिरा के माध्यम
से बाये आलिंद में
लाया जाता है।
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बाये
आलिंद से ओक्सीजनित रक्त
रक्त को बाये निलय
में पहुचाया जाता है।
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बाये
आलिंद व बाये निलय
के मध्य द्विवलन कपाट
उपस्थित होता है।
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बाये
निलय से ऑक्सीज़नीत रक्त
को महाधमनी के माध्यम से
वापस शरीर के प्रत्येक
अंगों तक पहुचाया जाता
है।
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मानव
ह्रदय में रक्त दो
बार आता है। एक
बार तो दाये तरफ
अनओक्सीजनित रक्त। दूसरी बार बाये तरफ
ऑक्सीज़नीत रक्त। इसी कारण इसे
दोहरा परिसंचरण तन्त्र कहते है।
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महत्वपूर्ण
जानकारी
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जब
धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमने
लग जाता है तो
रक्त के परिसंचरण में
बाधा आने लगती है।
और कोरोनरी धमनी अवरुद्ध हो
जाती है। जिसके कारण
कारण ह्रदयघात आ जाता है।
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जब
रक्त के परिसंचरण में
बाधा आती है और
ह्रदय के द्वारा रक्त
को आगे भेजने के
लिये जो दाब लगाया
जाता है उसे रक्तदाब
कहते है।
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मानव
का सामान्य रक्तदाब 120/80 mmHg होता है।
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120-सिस्टॉल
दाब कहते है। और
80 - डाएस्टोल दाब कहलाता है।
mmHg मिलीमीटर पारा का दाब
कहलाता है।
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सिस्टॉल
से तात्पर्य धमनी के सिकुड़ने
से है। तथा डाएस्टोल
का तात्पर्य धमनी के फैलने
से है।
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रक्तदाब
की गणना ब्रोकीयन धमनी
के माध्यम से की जाती
है। यह हमारे कोहनी
के पास होती है।
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रक्तदाब
की गणना स्फाइग्मोमेनोमीटर के माध्यम
से की जाती है।
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स्फाइग्मोमेनोमीटर
की खोज रीवा वारिश्कि
ने की थी।
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ह्रदय
की जांच ईसीजी (इलेक्ट्रो
कार्डियो ग्राफी) के माध्यम से
की जाती है।
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ह्रदय
की दूसरी जांच का दूसरा
नाम 24 hors holder
test है।
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रक्तदाब
का उच्च होना हाइपरटेंशन
कहलाता है।
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रक्तदाब
का निम्न होना हाइपोटेंशन कहलाता
है।
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ह्रदय
की धड़कन सामान्य गति
से कम होना बरेडिकार्डियो
कहलाता है। व सामान्य
से ज्यादा होना ट्रेडिकार्डियो कहलाता
है।
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दो
धड़कनो के मध्य 0.8 सेकंड
का समय लगता है।
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ह्रदय
दो धड़कनो के मध्य आराम
करता है।
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एक
धड़कन में 70 मिलीलीटर रक्त की पम्पिंग
होती है। और एक
मिनट में 4.5 से 5 लीटर रक्त
की पम्पिंग होती है।