एक विशेष प्रकार का प्रोटीन जो रक्त में उपस्थित होता है। यह प्रोटीन हर एक मनुष्य के रक्त में नही होता।
1940 में कार्ल लेंडस्टिनर व विनर ने मकाके रीसस नामक बंदर के रक्त की जांच करने पर उसके रक्त में ये प्रोटीन देखा।
फिर मनुष्य के रक्त में भी जांच से पता लगा कि ये प्रोटीन हर एक मनुष्य के रक्त में नही होता।
रीसस बंदर पर ये प्रोटीन दिखने के कारण इस प्रोटीन को Rh factor नाम दिया। Rh रीसस बंदर के नाम के पहले दो अक्षर से लिया है।
Rh factor से ही घनात्मक और ऋणात्मक रक्त समूह को विभाजित किया जाता है।
जिस रक्त में Rh factor मतलब वो प्रोटीन उपस्थित होता है वो रक्त समूह घनात्मक रक्त समूह होता है। जिसमे ये प्रोटीन या Rh factor अनुपस्थित होता है वो रक्त समूह ऋणात्मक रक्त समूह कहलाता है।
भारत मे लगभग 93% व विश्व मे 85% लोगो के रक्त में Rh factor उपस्थित है।
एक (+)ve रक्त समूह वाले पुरुष का विवाह एक -ve रक्त समूह वाली महिला से हो जाता है। तो उनकी पहली संतान तो सामान्य होगी लेकिन अन्य सन्ताने गर्भावस्था में ही मर जाएगी। इस क्रिया को इरिथ्रो ब्लास्टोसीस फिटेलिस कहते है।
इरिथ्रो ब्लास्टोसिस फिटेलिस के निवारण के लिये प्रथम प्रसव के पश्यात महिला के शरीर मे 24 घण्टे के अंदर anti-D का टीका लगाया जाता है।